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नए वर्ष के गीत
*
अभी बरस बीता है
कल होगी भोर नए साल की
बीच के अछूते पल
सपनों के
कहते हैं हाल
गैर-अपनों के
बाँध रहा
वक्त का मछेरा है
गाँठ नई सूरज के जाल की
जलसे के बाद
शहर सोया है
बच्चा जो भूखा था
रोया है
आसमान से
बरसी राख थी
झील मरी - घटना है हाल की
बर्फ जो जमी है
कल पिघलेगी
अलबेली किरण नई
निकलेगी
आशा है
धुंध छंटेगी -
लहर-लहर सरसेगी ताल की
*
नया साल
बच्चों की आँखों में नये-नये सपनों-सा
नया साल
पत्तों में धूप-छाँव
लुकाछिपी किरणों की
भोली इच्छाएँ हैं
आँखों में हिरणों की
नया साल
पिछली शंकाओं का तोड़ रहा इंद्रजाल
नया साल
मूँगे के टापू पर
हलचल है नावों की
चर्चाएँ होतीं फिर
परियों के गाँवों की
नया साल
बर्फ के इलाकों में बिछा रहा है पुआल
नया साल
मेंहदी की छवियाँ हैं
भोर की हथेली पर
नाच रहे मोर मस्त
खेत में - हवेली पर
नया साल
लाया है साथ कई नये-नये यह सवाल
नया साल
*
जन्मदिन यह नये सूरज का
सब सुखी हों
सुबह ने जो खत लिखा
शुभकामना का
उसे बाँचो
हवा महकी
पत्तियों ने किया नर्तन
संग नाचो
वक्त है यह, बंधु, अचरज का
सब सुखी हों
लिख रहीं 'शुभ लाभ' किरणें
ठूँठ चंपा के सिरे पर
जप रहा है मंत्र सपनों के
उधर बूढ़ा दुआघर
रंग बिखरा स्वर्ण-नीरज का
सब सुखी हों
हँसा बच्चा
बांसुरी के सुर बजे हैं कहीं भीतर
लिख रहा दिन
ओस-भीगी घास पर है
नेह-आखर
याद आया विरुद पदरज का
सब सुखी हों
*
झुंड-झुंड उड़ रहे कबूतर
आसमान में
नये साल का पहला दिन है
सुखी लग रही
धूप-नहाये चंपा पर
फिर रही गिलहरी
लड़का गया इधर से, देखो
अभी बजाता हुआ पिपहरी
ढोलक बजी
गली के नुक्कड़ के मकान में
नये साल का पहला दिन है
बच्चा हँसा पड़ोसी के घर
वही, बन्धु, सुर
नये साल का
सोनबरन है कौंध हवा में
जल सोनलाया उधर ताल का
भोग रहा सुख
आँगन डूबा हुआ ध्यान में
नये साल का पहला दिन है
राख हुई थी जो पगडंडी
उस पर भी
उग रही घास है
मौसम भीतर का भी, देखो
पहने फूलों का लिबास है
जोगी का
इकतारा बोला नई तान में
नये साल का पहला दिन है
*
भाई, मानें
यह कैलेंडर बुढ़ा गया है
इसे हटाएँ
दिन उत्पाती रहे और ठग
उन्हें न टेरें
रामनाम की उलटी माला
बन्धु, न फेरें
स्वस्थ-सुखी हो
सीधी-सच्ची
ऐसी पावन तिथियाँ लाएँ
राजा चेतें
परजा रहे न भूखी-नंगी
फिर हरियायें
बरगद की शाखें जो सूखी
धुएँ न सिरजें
आग लगी जो केसरवन में
उसे बुझाएँ
जुम्मन-रमुआ की आँखें भी
रहें न सूनी
छप्पर-छानी
झोरें नहीं हवाएँ खूनी
हुई कोयला
वही काठ की हाँडी
मत हर बार चढाएँ
नए वर्ष के गीत
*
अभी बरस बीता है
कल होगी भोर नए साल की
बीच के अछूते पल
सपनों के
कहते हैं हाल
गैर-अपनों के
बाँध रहा
वक्त का मछेरा है
गाँठ नई सूरज के जाल की
जलसे के बाद
शहर सोया है
बच्चा जो भूखा था
रोया है
आसमान से
बरसी राख थी
झील मरी - घटना है हाल की
बर्फ जो जमी है
कल पिघलेगी
अलबेली किरण नई
निकलेगी
आशा है
धुंध छंटेगी -
लहर-लहर सरसेगी ताल की
*
नया साल
बच्चों की आँखों में नये-नये सपनों-सा
नया साल
पत्तों में धूप-छाँव
लुकाछिपी किरणों की
भोली इच्छाएँ हैं
आँखों में हिरणों की
नया साल
पिछली शंकाओं का तोड़ रहा इंद्रजाल
नया साल
मूँगे के टापू पर
हलचल है नावों की
चर्चाएँ होतीं फिर
परियों के गाँवों की
नया साल
बर्फ के इलाकों में बिछा रहा है पुआल
नया साल
मेंहदी की छवियाँ हैं
भोर की हथेली पर
नाच रहे मोर मस्त
खेत में - हवेली पर
नया साल
लाया है साथ कई नये-नये यह सवाल
नया साल
*
जन्मदिन यह नये सूरज का
सब सुखी हों
सुबह ने जो खत लिखा
शुभकामना का
उसे बाँचो
हवा महकी
पत्तियों ने किया नर्तन
संग नाचो
वक्त है यह, बंधु, अचरज का
सब सुखी हों
लिख रहीं 'शुभ लाभ' किरणें
ठूँठ चंपा के सिरे पर
जप रहा है मंत्र सपनों के
उधर बूढ़ा दुआघर
रंग बिखरा स्वर्ण-नीरज का
सब सुखी हों
हँसा बच्चा
बांसुरी के सुर बजे हैं कहीं भीतर
लिख रहा दिन
ओस-भीगी घास पर है
नेह-आखर
याद आया विरुद पदरज का
सब सुखी हों
*
झुंड-झुंड उड़ रहे कबूतर
आसमान में
नये साल का पहला दिन है
सुखी लग रही
धूप-नहाये चंपा पर
फिर रही गिलहरी
लड़का गया इधर से, देखो
अभी बजाता हुआ पिपहरी
ढोलक बजी
गली के नुक्कड़ के मकान में
नये साल का पहला दिन है
बच्चा हँसा पड़ोसी के घर
वही, बन्धु, सुर
नये साल का
सोनबरन है कौंध हवा में
जल सोनलाया उधर ताल का
भोग रहा सुख
आँगन डूबा हुआ ध्यान में
नये साल का पहला दिन है
राख हुई थी जो पगडंडी
उस पर भी
उग रही घास है
मौसम भीतर का भी, देखो
पहने फूलों का लिबास है
जोगी का
इकतारा बोला नई तान में
नये साल का पहला दिन है
*
भाई, मानें
यह कैलेंडर बुढ़ा गया है
इसे हटाएँ
दिन उत्पाती रहे और ठग
उन्हें न टेरें
रामनाम की उलटी माला
बन्धु, न फेरें
स्वस्थ-सुखी हो
सीधी-सच्ची
ऐसी पावन तिथियाँ लाएँ
राजा चेतें
परजा रहे न भूखी-नंगी
फिर हरियायें
बरगद की शाखें जो सूखी
धुएँ न सिरजें
आग लगी जो केसरवन में
उसे बुझाएँ
जुम्मन-रमुआ की आँखें भी
रहें न सूनी
छप्पर-छानी
झोरें नहीं हवाएँ खूनी
हुई कोयला
वही काठ की हाँडी
मत हर बार चढाएँ
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